यह कैसे काम करता है
भारत में वेतनभोगी व्यक्ति पर वित्त वर्ष की आय के आधार पर टैक्स लगता है। वित्त वर्ष 2026-27 (1 अप्रैल 2026 से 31 मार्च 2027, निर्धारण वर्ष 2027-28) में आयकर अधिनियम, 2025 लागू है और बजट 2026 ने स्लैब और रिबेट नहीं बदले। नई रिजीम डिफ़ॉल्ट है; अगर आपकी कटौतियाँ बड़ी हैं तो पुरानी रिजीम चुन सकते हैं। यह कैलकुलेटर आयकर विभाग और केंद्रीय बजट में प्रकाशित दरों पर चलता है।
नई रिजीम: स्लैब, स्टैंडर्ड डिडक्शन और रिबेट
75,000 रुपये के स्टैंडर्ड डिडक्शन के बाद स्लैब ये हैं: 4 लाख तक शून्य, 8 लाख तक 5%, 12 लाख तक 10%, 16 लाख तक 15%, 20 लाख तक 20%, 24 लाख तक 25% और उसके ऊपर 30%। धारा 87A के तहत 60,000 रुपये तक का रिबेट कर-योग्य आय 12 लाख तक होने पर टैक्स शून्य कर देता है, यानी 12.75 लाख तक की सैलरी पर कोई टैक्स नहीं। इससे थोड़ा ऊपर मार्जिनल रिलीफ टैक्स को 12 लाख से ऊपर की आय के बराबर तक सीमित रखती है। टैक्स पर 4% स्वास्थ्य और शिक्षा सेस जुड़ता है; सरचार्ज 50 लाख से ऊपर 10%, 1 करोड़ से ऊपर 15% और 2 करोड़ से ऊपर 25% है, और नई रिजीम में यही अधिकतम है।
पुरानी रिजीम
पुरानी रिजीम के स्लैब (60 वर्ष से कम) हैं: 2.5 लाख तक शून्य, 5 लाख तक 5%, 10 लाख तक 20% और उसके ऊपर 30%। स्टैंडर्ड डिडक्शन 50,000 रुपये है, धारा 80C में 1.5 लाख तक की छूट है (कर्मचारी PF भी इसी में गिना जाता है; बाकी निवेश 80C वाले खाने में डालें) और प्रोफेशनल टैक्स की कटौती मिलती है। 5 लाख तक कर-योग्य आय पर 12,500 रुपये का रिबेट है, और 5 करोड़ से ऊपर सरचार्ज 37% तक जाता है। धारा 80D, HRA, LTA और होम लोन ब्याज इस कैलकुलेटर में शामिल नहीं हैं।
PF और प्रोफेशनल टैक्स
कर्मचारी भविष्य निधि (EPF) बेसिक का 12% होती है। 17 सितंबर 2026 से EPF की अनिवार्य वेतन सीमा 15,000 से बढ़ाकर 25,000 रुपये प्रति माह कर दी गई है (अधिसूचना S.O. 5109(E)); "वेतन सीमा तक" विकल्प पूरे साल के लिए नई सीमा लेता है, जबकि "असली बेसिक" पूरे बेसिक का 12% मानता है। प्रोफेशनल टैक्स राज्य लगाते हैं और संविधान के अनुसार सालाना अधिकतम 2,500 रुपये हो सकता है; यहाँ इसे सालाना एक रकम माना गया है। नई रिजीम में दोनों में से कोई भी आय से घटाया नहीं जाता।
उदाहरण
15,00,000 रुपये सालाना सैलरी, बेसिक 40%, नई रिजीम: स्टैंडर्ड डिडक्शन के बाद कर-योग्य आय 14,25,000 रुपये, टैक्स 93,750 रुपये + 4% सेस = 97,500 रुपये; PF (25,000 रुपये मासिक सीमा पर) 36,000 रुपये; इन-हैंड सैलरी 13,66,500 रुपये सालाना। 12,75,000 रुपये पर टैक्स शून्य है और 13,00,000 रुपये पर मार्जिनल रिलीफ के कारण सिर्फ 26,000 रुपये। पुरानी रिजीम में 15,00,000 रुपये, 80C में 1.5 लाख और 2,500 रुपये प्रोफेशनल टैक्स के साथ कर-योग्य आय 12,97,500 रुपये और टैक्स 2,09,820 रुपये बनता है।