लोन की रकम, ब्याज दर और अवधि डालें और मासिक EMI के साथ पूरा अमॉर्टाइज़ेशन शेड्यूल पाएँ। हर महीने अतिरिक्त भुगतान जोड़कर देखें कि लोन कितना जल्दी ख़त्म होगा और कितना ब्याज बचेगा।
लोन अमॉर्टाइज़ेशन कैलकुलेटर
मासिक EMI
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यह कैसे काम करता है
अमॉर्टाइज़ेशन का मतलब है लोन को बराबर किस्तों (EMI) में चुकाना। हर किस्त उतनी ही होती है, पर उसका बँटवारा बदलता रहता है: शुरुआती किस्तों में ज़्यादातर हिस्सा ब्याज का होता है, क्योंकि ब्याज बड़े बकाये पर लगता है; बाद की किस्तों में ज़्यादातर मूलधन चुकता है।
M = P × r ÷ (1 − (1 + r)−n)
M — मासिक EMI
P — लोन की रकम
r — सालाना दर ÷ 12 ÷ 100
n — मासिक किस्तों की संख्या
हर महीने ब्याज = बकाया × r; किस्त का बाक़ी हिस्सा बकाया घटाता है। कोई भी अतिरिक्त भुगतान सीधे बकाये में जाता है, इसलिए आगे के हर महीने का ब्याज भी घट जाता है — यही वजह है कि लोन की शुरुआत में किए छोटे-छोटे अतिरिक्त भुगतान इतनी बचत कराते हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
शुरुआत में मूलधन इतना कम क्यों चुकता है?
ब्याज उस बकाये पर लगता है जो अभी चुकाना बाक़ी है। शुरुआत में बकाया सबसे ज़्यादा होता है, इसलिए तय EMI का बड़ा हिस्सा ब्याज में जाता है। मूलधन में जाने वाला हिस्सा हर महीने बढ़ता है।
अतिरिक्त भुगतान हर महीने करना बेहतर है या साल में एक बार?
हर महीने करना थोड़ा बेहतर है, क्योंकि बकाया — और उस पर लगने वाला ब्याज — जल्दी घटता है। फ़र्क़ छोटा है; सबसे ज़रूरी है लोन के शुरुआती सालों में अतिरिक्त भुगतान करना।
क्या मेरा बैंक भी यही शेड्यूल इस्तेमाल करता है?
ज़्यादातर फ़िक्स्ड रेट लोन ठीक इसी तरीके से चलते हैं। कुछ बैंक राउंडिंग अलग करते हैं या ब्याज रोज़ाना जोड़ते हैं, इसलिए आख़िरी किस्त में कुछ रुपये-पैसे का अंतर आ सकता है।